Gig Economy का उभार: कैसे बदल रही है भारत में Personal Finance की तस्वीर

देखिए, आपने ध्यान दिया होगा – चाहे 45 डिग्री की गर्मी हो या मूसलाधार बारिश, चाहे रात के 2 बजे हों या सुबह के 6, हम एक –app खोलते हैं और कुछ ही मिनटों में खाना, सामान या ride घर पहुंच जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो लोग यह सब possible बनाते हैं, उनकी financial reality क्या है?

गिग इकॉनमी क्या है – और यह इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है?

Gig Economy का मतलब है – short-term, flexible jobs जो digital platforms के through मिलते हैं। चाहे Swiggy का delivery partner हो, Uber का driver, या Upwork पर freelance graphic designer – ये सब gig workers हैं।

भारत में 2020-21 में लगभग 7.7 million gig workers थे, जो 2024-25 में बढ़कर 12 million हो गए हैं। यह करीब 55% की growth है सिर्फ 4 सालों में!

और यह तो बस शुरुआत है। Government estimates के अनुसार 2029-30 तक यह संख्या 23.5 million तक पहुंच सकती है।

लेकिन सवाल यह है – यह इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है?

तीन बड़े कारण हैं:

पहला, Digital Penetration – आज भारत में स्मार्टफोन इतने सस्ते हो गए हैं कि tier-2 और tier-3 cities में भी लोग इन platforms तक पहुंच पा रहे हैं।

दूसरा, COVID का असर – महामारी ने पूरी तरह बदल दिया कि लोग काम को कैसे देखते हैं। Home delivery और quick commerce explode हो गया, और इसी के साथ gig jobs की demand भी।

तीसरा, Gen Z का mindset – आज की पीढ़ी 9-to-5 jobs में कम interested है। वह flexibility चाहती है, work-life balance चाहती है।

Personal Finance पर असरइसका क्या हैं ?

अब असली बात पर आते हैं – gig economy का personal finance पर क्या impact पड़ रहा है? यह एक coin के दो sides जैसा है।

अच्छी तरफ यह है कि इससे नए अवसर मिलते हैं,

1. Financial Independence का नया रास्ता

Gig economy में महिलाओं की participation लगभग 28% तक पहुंच गई है। यह बहुत बड़ी बात है। घर बैठे services देकर वह अपनी financial autonomy बढ़ा रही हैं।

मान लीजिए एक महिला जो traditionally घर पर ही रहती थी, अब UrbanClap जैसे platforms पर beauty services या cooking classes offer कर रही है। वह अपनी schedule खुद decide करती है और independent income earn कर रही है।

2. Extra Income का Source

बहुत से लोग जिनकी main job है, वह side income के लिए gig work करते हैं। Weekend पर Uber चलाना, शाम को freelance content writing करना – यह सब additional financial cushion provide करता है।

3. Youth Employment

Traditional jobs में जहां experience मांगा जाता है, वहीं gig economy ने freshers के लिए doors खोल दिए। College students अपनी पढ़ाई के साथ-साथ earn कर सकते हैं।

gig economy के स्याह पहलु क्या हैं ?

हर चमकती चीज सोना नहीं होती। Gig economy की जो dark reality है, वह बहुत कम लोग बताते हैं।

1. Income की Unpredictability

Traditional job में आपको पता होता है कि महीने के आखिर में कितनी salary आएगी। लेकिन gig work में? कुछ delivery workers सिर्फ ₹10,000 महीने कमाते हैं, जबकि वह 10-12 घंटे रोज काम करते हैं।

यह income volatility personal financial planning को बेहद मुश्किल बना देती है:

  • EMI कैसे pay करोगे जब अगले महीने की income uncertain है?
  • Emergency fund कैसे बनाओगे जब saving ही मुश्किल हो?
  • Home loan कैसे लोगे जब bank को consistent income proof नहीं दे सकते?

2. कोई Social Security नहीं

यह सबसे बड़ी problem है। NITI Aayog की 2024 की report बताती है कि 90% gig workers के पास कोई savings नहीं है और वह emergencies के लिए बेहद vulnerable हैं।

Salaried employees को मिलता है:

Gig workers को? कुछ नहीं।

मान लो एक Swiggy delivery partner को accident हो जाता है। उसका:

  • कोई medical cover नहीं
  • कोई paid leave नहीं (काम नहीं तो पैसा नहीं)
  • कोई disability insurance नहीं
  • परिवार के लिए कोई financial protection नहीं

3. Hidden Costs जो नहीं दिखतीं

Delivery partners को खुद का bike maintain करना पड़ता है:

  • Petrol/CNG
  • Bike servicing
  • Insurance
  • EMI (अगर bike loan पर ली है तो)

इन सब को घटाने के बाद actually जो बचता है, वह बहुत कम होता है।

वैसे आप इसको अच्छे से समझना चाहते हैं, तो आप Dhruv Raathee का विडियो भी देख सकते हैं |

Gig economy ना तो पूरी तरह अच्छी है, ना पूरी तरह बुरी। यह एक reality है जो यहां है और आने वाले सालों में और बढ़ेगी।

2047 तक भारत में gig workforce 62 million तक पहुंच सकती है। यह हमारी economy का एक major part होगी।

सवाल यह है – क्या हम इसे ऐसे shape कर सकते हैं कि workers सिर्फ “cheap labour” ना बनें, बल्कि dignified living earn कर सकें?

इसका जवाब तीन तरफ से action लेने में है:

  • Workers को financially literate होना होगा
  • Companies को ethical responsibility लेनी होगी
  • Government को strong regulations लाने होंगे

तभी gig economy सच में “economy of opportunities” बनेगी, ना कि “economy of exploitation.”

याद रखिए, अगली बार जब आप 10-minute delivery का order करें, तो उस delivery partner के बारे में सोचिए। वह सिर्फ एक “gig worker” नहीं है – वह किसी का बेटा है, किसी का पति है, किसी का पिता है। और उसकी financial security भी उतनी ही important है जितनी आपकी। वो अगर देर हो जाएँ तो उसके ऊपर गुस्सा न करना है, उसको अपना जैसा ही मान के कि वो भी काम ही कर रहा हैं, आदमी उसको समझे, आपके सहूलियत को उसने बहुत आसन कर दिया हैं, बाकी सरकार भी इन gig workers के लिए कुछ-न-कुछ ज़रूर करें | और धुर्व राठी के विडियो के बाद, सोशल मीडिया पर, इसके बारे में लोगों ने चर्चा भी किया हैं |

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