मेरे एक दोस्त हैं, जिनका नाम है Ramesh, साल 2020 में जब corona की वजह से पूरा market crash हुआ था, तब वह बहुत घबराए हुए थे। उनके portfolio में कुछ छोटी-छोटी companies के shares थे जो literally आधे हो गए थे। लेकिन एक चीज़ थी जो उनके portfolio में बची रही थी, वो थे Reliance के shares।
गिरे ज़रूर थे reliance के शेयर्स, पर टूटे नहीं थे,
और जब market recover हुआ, तो वो सबसे पहले वापस आए।
यही होती हैं blue chip companies, अगर संक्षित्प में मेरे को बताना पड़े तो] वैसे आज के आर्टिकल में इसके बारे में डिटेल में चर्चा होगी|

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Blue Chip — यह नाम आया कहाँ से?
“Blue Chip” शब्द actually poker से आया है। जो लोग cards खेलते हैं, उन्हें पता होगा कि poker में तीन रंग के chips होते हैं —red, white और blue। इनमें से blue chip सबसे ज्यादा value का होता है।
1920s के आसपास एक American journalist Oliver Gingold ने पहली बार यह term share market के लिए use किया। उन्होंने देखा कि कुछ companies के shares हमेशा बहुत ऊँचे price पर trade होते हैं। तो उन्होंने कहा —ये तो poker की blue chips जैसी हैं। और फिर यह नाम चल पड़ा। और आज लगभग सब इसका इस्तमाल करते है |
आज 100 साल बाद भी यह term उतना ही relevant है।

असल में blue chip company होती क्या है?
देखिए, कोई official definition नहीं है कि फलाँ company blue chip है या नहीं। लेकिन कुछ characteristics होती हैं जो इन्हें अलग बनाती हैं।
पहली बात — उम्र।
Blue chip companies पुरानी होती हैं। दशकों से। कभी-कभी सदियों से। Tata Group की नींव 1868 में रखी गई थी यानी 150 साल से ज्यादा पुरानी है यह कंपनी, ITC 1910 की है। HDFC Bank 1994 में बनी थी, जो relatively नई है, लेकिन 30 साल में ऐसी reputation बनाई कि blue chip कहलाती है।
दूसरी बात — size।
ये companies बहुत बड़ी होती हैं। Market capitalization के हिसाब से। India में हम generally Nifty 50 या BSE Sensex की companies को blue chip मानते हैं—क्योंकि इनमें country की सबसे बड़ी और most established companies हैं।
तीसरी बात— debt कम होता है।
अच्छी blue chip companies financially बहुत strong होती हैं। इनके ऊपर इतना कर्ज़ नहीं होता कि कोई economic slowdown इन्हें डुबो दे।
अब ब्लू चिप कम्पनी को थोडा डिटेल में समझते हैं,
मान लीजिए आपके गाँव में दो पेड़ हैं।
एक है — ऊँचा, पतला, तेज़ी से बढ़ने वाला bamboo। बारिश में हरा-भरा। धूप में चमकता हुआ। लेकिन जब आँधी आती है? वह टूट जाता है। जड़ें उखड़ जाती हैं। आपको कल्पना करना होगा,इस बांस का|
दूसरा है — पुराना बरगद। शायद उतना ऊँचा नहीं। शायद उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ता। लेकिन उसकी जड़ें इतनी गहरी हैं, इतनी फैली हुई हैं, कि आँधी तूफ़ान सब में वह खड़ा रहता है। सालों से। तो Blue chip companies वह बरगद हैं। Small cap या penny stocks वह bamboo। एक ज्यादा exciting लगता है। दूसरा ज्यादा safe है।मतलब छोटे-मोटे तूफानों से ब्लू चिप को कुछ नहीं होता है |
India की कुछ famous blue chip companies
Reliance Industries — Mukesh Ambani की company। Oil, telecom, retail — सब कुछ में। Market cap की बात करें तो India की सबसे बड़ी company। 2020 के crash में गिरी, लेकिन जल्दी recover भी हो गयी थी|
TCS (Tata Consultancy Services) — IT sector की रानी। दुनियाभर की governments और बड़ी corporations इसकी client हैं। Dividend history देखें तो consistently बेहतरीन।
HDFC Bank — Banking sector में। जब भी banking crisis आती है, HDFC Bank उसमें से comparatively बेहतर निकलती है। NPA (non-performing assets) control में रखने का इनका record बाकी banks से अच्छा रहा है।
Infosys — IT sector में TCS की बड़ी competitor। Narayana Murthy की बनाई हुई company जो आज global giant है। नारायण मूर्थी भी वैसे बहुत फेमस है|
Blue chip stocks में invest करना चाहिए?
यह वाला सवाल तो हर नए investor के मन में होता है।
सीधा जवाब है — हाँ, लेकिन अंधाधुंध नहीं।
Blue chip stocks में invest करने के फायदे यह हैं कि आपकी नींद चैन की रहती है। आप रात को सो सकते हैं बिना यह worry किए कि कल company बंद हो जाएगी। ये companies established हैं, regulated हैं, transparent हैं।
लेकिन एक limitation भी है।
Blue chip stocks generally multibagger नहीं बनते। मतलब अगर आप चाहते हैं कि ₹1 लाख 3-4 साल में ₹10 लाख हो जाएँ, तो blue chip stocks से यह उम्मीद थोड़ी ज्यादा है। इसके लिए आपको small cap या mid cap में देखना होग—लेकिन वहाँ risk भी उतना ज्यादा है।
Warren Buffett और blue chip का connection क्या है ?
Warren Buffett — दुनिया के सबसे successful investor। उनकी investment philosophy का core idea यही है जिसे हम blue chip investing कहते हैं।
उनका famous quote है: “It’s far better to buy a wonderful company at a fair price than a fair company at a wonderful price.”
यानी — एक बढ़िया company का share थोड़ा महँगा भी लो, तो चलता है। लेकिन एक average company का share सस्ते में भी खरीदो, तो वो long term में नुकसान देगी।
Buffett ने Coca-Cola में 1988 में invest किया। आज 35 साल बाद भी वो hold कर रहे हैं। Coca-Cola एक classic blue chip example है — 1886 से चल रही company जो अभी भी दुनिया के 200 से ज्यादा countries में बिकती है।
India में भी Rakesh Jhunjhunwala ने Titan Company में इतने साल पहले invest किया और लंबे समय तक hold किया। Titan आज India की top blue chip में आती है।
blue chip भी fail हो सकती हैं क्या ?
बिलकुल हो सकती है, मैं कुछ कंपनियों के नाम बता दे रहा हूँ, आप खुद ही देख लीजिये,
YesBank को याद करें। एक वक्त था जब वह बहुत बड़ा नाम था Indian banking में। लेकिन 2020 में RBI को दखल देना पड़ा। Shareholders को भारी नुकसान हुआ।
Lehman Brothers — America का वो bank जो 2008 में डूब गया था। उसे blue chip ही समझा जाता था।
इसका मतलब यह नहीं कि blue chip में invest मत करो। मतलब यह है कि — diversification हमेशा ज़रूरी है। अपना पूरा पैसा एक company में मत लगाइए, चाहे वो कितनी भी बड़ी हो।
अगर आप investing में नए हैं, तो blue chip stocks या large cap mutual funds से शुरुआत करना सबसे sensible decision है। नींद भी आएगी, पैसा भी बढ़ेगा—बस थोड़ा patience रखना होगा।