मेरे को आज भी याद है जब मेरे दादाजी कहा करते थे — “बेटा, उधार वो आग है जो अंदर से जलाती है, और पता तब चलता है जब सब जल चुका होता है।”
उस वक्त मुझे लगा यह बस एक पुरानी कहावत है। लेकिन जब मैंने अपने आसपास देखा — वह चाचा जिन्होंने motorcycle loan लिया था, वो बुआ जिन्होंने बेटे की शादी में चार लाख का credit card debt बनाया, वो दोस्त जो हर month loan EMI के लिए नई loan लेता है — तब समझ आया कि दादाजी बिलकुल सही थे।

आज के आर्टिकल में हम लोग Leaky Bucket Thoery के बारे में बात करेंगे, यह article सिर्फ finance के बारे में नहीं है। यह उन लाखों भारतीय परिवारों की बात है जो दिन रात मेहनत करते हैं, लेकिन महीने के अंत में पैसा कहाँ जाता है — यह समझ ही नहीं आता। और इस confusion की जड़ में है — ‘बुरा कर्ज’ यानी Bad Debt।
आज हम इसे एक बेहद simple concept से समझेंगे — “टूटी बाल्टी” (Leaky Bucket Theory)। और यह आर्टिकल सब के लिए हैं, यह theory उतनी ही सच है आज के 25 साल के IT professional के लिए, जितनी 60 साल के किसान के लिए। मतलब यह सब के लिए हैं|
आज से 40-50 साल पहले के भारत में एक अलिखित नियम था — “उधार सिर्फ मजबूरी में, और जल्दी से जल्दी चुकाओ।” हमारी दादी-नानी credit card नहीं जानती थीं, EMI का concept नहीं था, लेकिन वो यह ज़रूरजानती थीं किपराया पैसा पराया ही रहता है।
| ” हम लोग उस ज़माने में जब भी कुछ बड़ा खरीदना होता था — पहले बचाते थे, फिर खरीदते थे। उधार लेना मतलब रात को नींद न आना। आज के बच्चे ‘EMI’ में सब खरीद लेते हैं और सोचते हैं free में मिल गया। “ — रमादेवी, 68 वर्ष — Varanasi के एक middle-class परिवार की गृहिणी |

यह बात सुनने में old-fashioned लग सकती है। लेकिन economics के नज़रिए से — रमादेवी बिल्कुल सही कह रही हैं। क्योंकि जो बात वो feel से जानती हैं, वही बात modern financial psychology ने research करके prove की है।
‘टूटी बाल्टी’ यानी Leaky Bucket Theory — यह concept क्या है?
मान लीजिए आप रोज़ सुबह कुएं से पानी लाते हैं। बाल्टी भर के चलते हैं। लेकिन बाल्टी में एक छोटा-सा छेद है।
आप जितनी तेज चलते हैं, उससे भी तेज पानी टपकता जाता है। घर पहुंचते-पहुंचते आधी बाल्टी खाली।
| बाल्टी = आपकी मासिक income पानी = आपकी मेहनत की कमाई छेद = बुरे कर्ज की EMI और interest आप जितना भी कमाओ — अगर बाल्टी में छेद है, तो पानी हमेशा कम पड़ेगा। न बचत होगी, न तरक्की। |
अब यह छेद कहाँ-कहाँ से होता है? आइए देखते हैं।
बाल्टी में छेद करने वाले 5 सबसे बड़े ‘Bad Debt’
1. Credit Card का ‘Minimum Payment’ trap
यह सबसे खतरनाक छेद है। Credit card company आपको कहती है — ‘सिर्फ ₹500 minimum payment करो और बाकी बाद में।’ यह सुनने में कितना आसान लगता है, है न?
लेकिन असलियत देखिए मैं आपको समझता हूँ, अगर आपके credit card पर ₹50,000 का बकाया है और आप सिर्फ minimum payment करते हैं — तो 36% सालाना interest पर यह debt चुकाने में 7 से 8 साल लग सकते हैं। और आप कुल ₹1.2 लाख से ज्यादा interest के रूप में अदा करेंगे। बिलकुल मैंने यह रिसर्च करके यह डाटा बनाया हैं, मैं कोई हवा हवाई बातें नहीं कर रहा हूँ, जो सच हैं वो बता रहा हूँ, ठीक हैं,
2. ‘पड़ोसी ने लिया तो हम भी लेंगे’ — Consumer Loan Trap
यह छेद बहुत relatable है। पड़ोस में नई गाड़ी आई — हमें भी लेनी है। मतलब देखा-देखी करनी हैं, बेटे के दोस्त के पास iPhone है — हमारे बेटे को भी चाहिए। यह social pressure में लिया गया loan — जो कोई income नहीं generate करता — सबसे बड़ा bad debt है। और बहुत लोग इसमें फंसते हैं,
एक नई bike जो ₹80,000 की है — loan पर लो तो total cost होती है करीब ₹1,05,000 से ₹1,10,000 (3 साल की EMI में)। यानी आपने वो चीज़ 30% ज्यादा कीमत पर खरीदी जिसकी कीमत हर साल घटती जाती है।
3. शादी और त्योहारों का कर्ज — सबसे भावनात्मक छेद
यह छेद सबसे दर्दनाक है। बेटी की शादी में ‘इज्जत’ के लिए लाखों का loan, Diwali में दिखावे के लिए उधार, रिश्तेदारों की नज़र में अच्छे दिखने के लिए — यह सब bad debt के सबसे गहरे छेद हैं। यह तो बिलकुल कॉमन हैं, अपने देश में, लगभग, सब लोग बहुत पैसा खर्च करते हैं, अपने बेटी की शादी में,
India में शादी के बाद लिए गए loans के कारण कई परिवार 5 से 10 साल तक financial stress में रहते हैं। और जिस ‘इज्जत’ के लिए यह सब किया — वो इज्जत तो party खत्म होने के बाद अगले दिन से भूल जाती है। और मामा-फूफा, वो तो कुछ-न-कुछ तो बोलेंगे ही, उनका मन तो कभी खुश होगा ही नहीं |
4. Local moneylender और Chit Fund Scams — गाँव का सबसे पुराना छेद
यह छेद खासतौर पर rural और semi-urban India में बहुत common है। Local moneylender 36% से 60% सालाना interest लेता है। यानी अगर आपने ₹1 लाख उधार लिए — तो साल भर में आप ₹1.36 लाख से ₹1.60 लाख के हकदार हो जाते हो। और जो debt का cycle शुरू होता है, वो generation to generation चलता है। हालांकि अगर मैं बिहार की काहानी बताउं तो सम्राट चौधरी ने के कह दिया हैं, अब कोई भी ब्याज पर पैसा नहीं चला सकता हैं, इसका ध्यान रखना हैं | तो मैं उम्मीद करता हूँ, कि दुसरे स्टेट भी इसको फॉलो करेंगे |
5. Personal Loan को Personal ‘जरूरत’ समझने की गलती
‘Personal loan’ लेकर vacation जाना, नई LED TV खरीदना, या online shopping करना, आज कल तो मार्किट में कई नयी personal Loan की वेबसाइट भी आ गयी हैं, — यह सब जो हैं, वो bad debt की श्रेणी में आता है। Bank की ad देखकर लगता है — ‘instant approval, no questions asked।’ लेकिन 14% से 24% interest पर यह loan आपकी income का एक बड़ा हिस्सा हर month खींचता रहता है। तो यह बहुत ही खराब होता हैं |
Good Debt vs Bad Debt — एक नज़र में फर्क
सभी loans बुरे नहीं होते। फर्क जानना ज़रूरी है:
| Type | ❌ Bad Debt — बाल्टी में छेद | ✅ Good Debt — Investment |
| कर्ज का कारण | Depreciating चीज़ें (mobile, TV, गहने, party) | Appreciating चीज़ें (घर, education, business) |
| Return मिलता है? | नहीं — सिर्फ खर्च | हाँ — future income या value बढ़ती है |
| Interest Rate | 14%–36%+ (credit card, personal loan) | 7%–12% (home loan, education loan) |
| Tax Benefit | नहीं | हाँ (Section 80C, 24B) |
| Example | Phone EMI, शादी loan, vacation loan | Home loan, education loan, business loan |
| Long-term Effect | Stress, कम savings, कम wealth | Asset build होता है, net worth बढ़ती है |
तो फिर क्या करें? — ‘बाल्टी का छेद’ बंद करने के practical steps
Step 1: पहले ‘Audit’ करो — कितने छेद हैं?
एक कागज़ लो। अपनी सभी current EMIs और loans लिखो। Interest rate लिखो। Total amount बाकी लिखो। यह exercise अकेले आपकी आँखें खोल देगी। ज़्यादातर लोगों को पता भी नहीं होता कि वो कितना interest दे रहे हैं। तो यह एक अच्छा सलाह है इसको ज़रूर कीजिये |
Step 2: Highest Interest वाला Debt पहले चुकाओ
Financial planners इसे “Avalanche Method“ कहते हैं। जो loan सबसे ज़्यादा interest ले रहा है (जैसे credit card — 36%), उसे पहले खत्म करो। यह सबसे तेज़ तरीका है ‘छेद बंद करने का।’
Step 3: EMI = अधिकतम 40% Income
एक सरल नियम — आपकी सभी EMIs मिलाकर कभी आपकी income के 40% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर हैं, तो यह warning sign है।
Step 4: ‘Sinking Fund’ बनाओ — उधार की ज़रूरत ही न पड़े
यह concept simple है। अगर आपको पता है कि दो साल बाद बेटे की higher education होगी — तो अभी से हर month ₹2,000-3,000 अलग रखना शुरू करो। जब समय आएगा, पैसे तैयार होंगे। No loan needed।
Step 5: ‘Want’ और ‘Need’ में फर्क सीखो
यह वही बात है जो दादी कहती थीं। जब भी कुछ खरीदने की इच्छा हो — 24 घंटे रुको। अगर अगले दिन भी उतनी ही ज़रूरत लगे — तब सोचो। Impulse buying बंद होगी, और bad debt की ज़रूरत 60% कम हो जाएगी।
आज के दौर में loans और EMIs इतनी आसानी से मिलती हैं कि ‘ना’ कहना मुश्किल लगता है। लेकिन याद रखिए — bank आपका दोस्त नहीं है। वो business कर रहा है। आपको अपना दोस्त खुद बनना होगा।
और वो दोस्त बनने का पहला कदम है — “टूटी बाल्टी” के छेद पहचानना। आज ही। अभी ही। जो भी मैंने स्टेप बताएं है, उसको फॉलो कीजिये और और अपने आर्थिक सवतंत्र हासिल कीजिये |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q: क्या कोई भी loan लेना गलत है?
नहीं। Home loan, education loan — ये good debt हैं क्योंकि इनसे value create होती है। बुरा सिर्फ वो loan है जो consume करे, invest नहीं।
Q: अगर credit card पर बहुत debt है, तो सबसे पहले क्या करें?
सबसे पहले नई purchases बंद करें। फिर हर month maximum possible payment करें — minimum नहीं। अगर हो सके तो कोई personal loan लेकर credit card debt transfer करें (interest rate कम होगी)।
Q: शादी जैसे social events में loan लेना सही है?
जितना है उतने में करो। Social pressure के लिए 10 साल की financial peace मत बेचो। जो रिश्तेदार आपकी शादी की ‘simplicity’ पर comment करेंगे — वो EMI नहीं भरेंगे।
Q: Older generation को आज finance कैसे manage करनी चाहिए?
Fixed deposits, PPF, Senior Citizen Savings Scheme — ये safe options हैं। किसी के बहकावे में आकर किसी ‘scheme’ में पैसा मत लगाइए जो guarantee से ज़्यादा return का वादा करे।