भारत का Budget कैसे बनता है — Receipt से Expenditure तक की पूरी प्रक्रिया, सरल हिंदी में

तो बजट 2026 भी आ ही गया, Budget क्या होता हैं और कौन पेश करता हैं ?
यह हो हैं इसको प्रस्तुत करने का अधिकार राष्ट्रपति को होता हैं, लेकिन राष्ट्रपति किसी से भी बचत प्रस्तुत करवा सकता हैं,
वो चाहे रेल मंत्री हो, या वित्त मंत्री हो,
बजट जो होता हैं, यह पैसा निकालने के लिए नहीं होता हैं, यह यह बताने के लिए होता है कि साल भर में देश को चलाने के लिए इतना पैसा लगेगा और 10 रुपया इस योजना में जाए,50 रुपया सैलरी जाएगा, तो 50 Infrastructure में जाएगा, तो जनता को इसका जानकारी दिया जाता हैं, लोगों को बताया जाता हैं,

Budget=Annual Financial Statement

कितना कमाना हैं, कितना खर्चा किया है, कैसे करना हैं, यही सब प्लान हैं budget हैं |

Budget को कितने भाग में बांटा गया हैं ?

यानी बजट को भी दो भाग में बांटा गया,

  1. Receipt
  2. Expenditure

Receipt Budget क्या होता हैं ?

अब receipt में मतलब जो आमदनी होगा, वह कहाँ-कहाँ से होगा, यह भी बताया जाता हैं –

  1. reciept
    1. Revenue Receipt
      1. Tax
        1. DIRECT TAX
        1. INDIRECT TAX
      1. Non Tax
    1. Capital Reciept

Revenue reciept का मतलब क्या होता हैं ?

Revenue reciept का मतलब होता हैं economy में short term मतलब  जो जल्दी-जल्दी जो कमाई होता हैं,
ठीक,

Capital reciept का मतलब क्या होता हैं ?

Capital reciept का मतलब होता हैं LongTerm में जो कमाई होता हैं
अब revenue reciept में Non tax में जो आता हैं, वो जैसे चालान कट गया, ये सब पैसा भी सरकार के पास जा रहा हैं, किसी लोन जो लिया हुआ हैं, उसका Intrest का पैसा मिल रहा हैं, ये सब revenue recipet का Non tax में आता हैं, सरकार इसको रख लेती हैं,
तो revenue reciept की जो पहचान होती हैं, वो ये है कि इससे आपको कोई नुक्सान नहीं होता हैं, मतलब Assest में कोई Decrease नहीं हुआ, आपके ऊपर ऊपर कोई Liability नहीं हैं, मतलब आपको वापस इसको देना नहीं हैं | ये कमी जल्दी जल्दी होता हैं |
revenue receipt –

  1. चालान,
  2. fine,
  3. divident (लाभांश)_
  4. dividend समझ लो –

मान लो कि राजू और मुकेश और सुरेश ने मिलकर के एक पुस्तकालय खोला,
मुकेश – 50 rupees
सुरेश – 30 rupees
सुरेश – २० रुपीस
तो इनको प्रॉफिट हुआ 10 rupya, मतलब इन तीनों ने मिलाकर के 100 रुपया लगाया और इनको Profit हुआ 10 rupya,
अब मुकेश इस 10 rupes में पांच रूपये मिलेगा,
सुएर्ष को 3 rupye
suresh को २ रूपये,
तो यही हैं, लाभांश, मतलब लाभ का अंश – तो उसी पारकर goverment of india किसी कम्पनी में अपना पैसा लगाई हुई होगी, तो वही जितना शेयर ली होगी उस कंपनी में, उसका lलाभांश, मिलता हैं, सरकार लेती हैं 

Assest – पूँजी – मेरा घर मेरा पूँजी हैं, मेरा विद्या मेरी पूँजी हैं, ये ही सब | मेरा लैपटॉप मेरा पूँजी

Liability – क़र्ज़ –
अब आ जाओ, Capital Reciept में –
मतलब reciept में ही एक revenue recipet था, अब Capital reciept हैं,
तो Capital reciept होता क्या हैं –
यह Long term में कमाई होता हैं,
दूसरा इसका कुछ नुक्सान भी होगा, मतलब आपका जो Assest हैं, उसमें decrease होगा,
तीसरा आपकी Liability increase होगी

budget Expenditure में Revenue Expenditure or Capital Expenditure क्या होता हैं ?

  1. revenue Expenditure
  2. Capital Expenditure

Revenue expedntirue – अब समझ, दो लड़के, एक का नाम राजू, दूसरें का नाम मोहन, दोनों को दहेज़ में मिला,

  1. करोड़ रूपये,

अब राजू जो हैं, वो सारा 1 करोड़ पसिया लुटा देता हैं, मतलब शादी के खर्च में, मेहमान नवाजी में, मतलब इसका 1 karod ख़त्म अब यह दुबारा इसको नहीं मिलने वाला,

अब वही उस एक करोड़ रूपये से जमीन खरीदता हैं, invest करता हैं, मतलब इसका 1 karod जो हैं, वो फायदा देगा, मतलब long term में यह इससे (Interst kaameyga, और भी बहुत साड़ी दामें जामीन की बढती जा रही हैं,

मतलब मोहन का खर्च फायदा देने वाला हैं, मतलब इसका पैसा कही गया नहीं, उल्ताह यह कम रहा हैं उस पैसे, जबकि राजू का सारा पैसा ख़त्म , तो मोहन का खर्च Capital expentue हैं, जबकि सोहन का खर्च revenue expedentirue हैं |

ठीक उसी पारकर सरकार, इस पारकर को खर्च जैसे मॉल बन्य्वाया, सडकें, यूनिवर्सिटी, अस्पताल, तो ये capital expendtiure ha,

jabki पेंशन का पैसा, सब्सिडी, ये revenu expendture हैं , मतलब इसका सर्कार को कोई फायदा नहीं हैं |

बजट को कौन पेश करता हैं ?

तो पहले बताया जाएगा, कि इतना आमदानी होने वाला हैं, मतलब कि revenue, तो यह पैसा आता कहाँ से हैं ?
तो यह पैसा आता हैं tax दे द्वारा, चाललं जो काटना है,
बजट पेश करने की प्रक्रिया व्यवस्थित और संगठित होती है, और इसमें कई महत्वपूर्ण चरण होते हैं। यहाँ मैं आपको सरल भाषा में समझाता हूँ कि कैसे भारत में बजट पेश किया जाता है:

  1. राजस्व का अनुमान (Revenue Estimates): सबसे पहले, सरकार यह अनुमान लगाती है कि आने वाले वित्तीय वर्ष में कितनी आमदनी होने वाली है। यह आमदनी मुख्य रूप से करों से आती है, जैसे कि आयकर, जीएसटी, कस्टम ड्यूटी, उत्पाद शुल्क आदि। इसके अलावा, सरकारी कंपनियों से होने वाली आय, दिवाला और नॉन-टैक्स रेवेन्यू भी शामिल होते हैं।
  2. व्यय की योजना (Expenditure Plan): फिर, सरकार यह निर्धारित करती है कि आय का उपयोग कैसे किया जाएगा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रक्षा, और विकासात्मक कार्यक्रमों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में खर्च शामिल होता है।
  3. बजट विधेयक (Budget Bill): आमदनी और व्यय के इन अनुमानों को बजट में प्रस्तुत किया जाता है। वित्त मंत्री द्वारा बजट का प्रस्ताव संसद में रखा जाता है। बजट पेश करने की तारीख आम तौर पर फरवरी का पहला दिन होती है।
  4. चर्चा और अनुमोदन (Discussion and Approval): बजट प्रस्तुति के बाद, संसद में इस पर विस्तृत चर्चा होती है। सांसद बजट के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखते हैं, और अंततः बजट को संसद की मंजूरी मिलनी चाहिए।
  5. विनियोग विधेयक (Appropriation Bill): बजट के अनुमोदन के बाद, विनियोग विधेयक संसद में पेश किया जाता है, जिसे पारित होने के बाद सरकार को खर्च करने की औपचारिक अनुमति मिलती है।

इस तरह, बजट एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत पेश किया जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य देश की आर्थिक व सामाजिक प्रगति को सुनिश्चित करना होता है।
बजट क्या होता हैं |
जो जिस वर्ष का बजट होता है उसी वर्ष का आमदनी भी होता हैं,
मतलब 1 अप्रैल से 31 march का कोई साल हैं, इस साल जितना पैसा आया आमदानी में, तो यही पैसा खर्च किया जाता हैं, उस बजट में जो जो चीज़ बताया गया, हैं, उसके लिए, मतलब , उसी साल का पैसा,

आपके ₹100 Tax का सरकार क्या करती है — एक रुपया-रुपया हिसाब (Budget 2025-26)

ज़्यादातर लोग budget सुनते हैं लेकिन यह नहीं जानते कि उनका खुद का पैसा कहाँ जाता है।

तो चलिए एक काम करते हैं। मान लीजिए आपने इस साल सरकार को कुल ₹100 tax दिया। Budget 2025-26 के अनुसार वह ₹100 कुछ इस तरह खर्च होता है:

खर्च की जगहआपके ₹100 में से
ब्याज चुकाना (Debt repayment)₹20
राज्यों को हिस्सा₹22
रक्षा (Defence)₹8
केंद्रीय योजनाएं₹16
सब्सिडी (खाद, गैस, खाना)₹6
शिक्षा और स्वास्थ्य₹4
Infrastructure (सड़क, रेल)₹10
बाकी प्रशासनिक खर्च₹14

यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है — आपके ₹100 में से ₹20 सिर्फ पुराने कर्ज़ का ब्याज चुकाने में चला जाता है। यानी सरकार जो उधार लेती है, उसका बोझ अगली पीढ़ी पर भी पड़ता है।

यही Capital Receipt और Revenue Expenditure का असली मतलब है — जो ऊपर explain किया गया।

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